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कुछ तो मैं कह बैठा हूँ, अभी बहुत कुछ बाकी है,

कागज-कलम हैं मीत मेरे, शब्द ही दिल के साकी हैं !

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प्रेम अनुभूतियाँ

"मेरी अभिव्यक्तियों में सूक्ष्म बिंदु से अन्तरिक्ष की अनन्त गहराईयों तक का सार छुपा है इनमें एक बेबस का अनकहा, अनचाहा प्यार छुपा है " -डा0 अनिल चडडा All the content of this blog is Copyright of Dr.Anil Chadah and any copying, reproduction,publishing etc. without the specific permission of Dr.Anil Chadah would be deemed to be violation of Copyright Act.

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Wednesday, June 18, 2008

एक ही ग़ल्ती हर बार क्यों करें !

जो हमसे प्यार न करें, उन्हे हम प्यार क्यों करें,
ग़मों का दिल में अपने यूँ ही हम अंबार क्यों करें ।

नहीं हैं मुश्किलें अपनी ज़हाँ में पहले से ही कम,
तो फिर ख़ारों से राहों को हम सरोबार क्यों करें ।

जिन्हे फुर्सत नहीं नज़रें उठा के देख लें हमको,
तो बेकार नज़रें उनसे हम दो-चार क्यों करें ।

किसी को न ज़रूरत हो हमारी अपने जीवन में,
बिना जाने ही उस पर हम कहो एतबार क्यों करें ।

वक्त तो कट ही जायेगा, हमारा भी, तुम्हारा भी,
तो फिर हम एक ही ग़ल्ती कहो हर बार क्यों करें ।

4 Comments:

Blogger रंजू ranju said...

वक्त तो कट ही जायेगा, हमारा भी, तुम्हारा भी,
तो फिर हम एक ही ग़ल्ती कहो हर बार क्यों करें ।

बहुत खूब लिखा है

June 18, 2008 at 10:26 PM  
Anonymous advocate rashmi saurana said...

वक्त तो कट ही जायेगा, हमारा भी, तुम्हारा भी,
bhut hi gahari hai ye paktiya. likhate rhe.

June 18, 2008 at 11:12 PM  
Blogger Udan Tashtari said...

बढ़िया है अनिल जी.

June 19, 2008 at 1:26 AM  
Blogger ©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) said...

रंजु, रश्मि एवं समीर जी,

प्रोत्साहन का बहुत-बहुत शुक्रिया !

June 20, 2008 at 8:49 PM  

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