" कोई आइल नहीं हैं हम !"
तेरी तरह संगदिल नहीं हैं हम,
चाहने वालों के कातिल नहीं हैं हम ।
सूरते-हाल पर कभी तो गौर करो,
इतने भी नाकाबिल नहीं हैं हम ।
दिल में कुछ औ’ चेहरे पर कुछ और रहे,
तुम जैसे तो आकिल(*) नहीं हैं हम ।
यूं शक से हरदम न देखा करो,
तुम्हारे लिये हलाहल(&) नहीं हैं हम ।
यूं न आँखें दिखा हाले-इजहार से,
एक इंसा हैं, कोई आइल(#) नहीं हैं हम ।
(*) बुद्धिमान (&) विष (#) सन्यासी
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