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कुछ तो मैं कह बैठा हूँ, अभी बहुत कुछ बाकी है,

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प्रेम अनुभूतियाँ

"मेरी अभिव्यक्तियों में सूक्ष्म बिंदु से अन्तरिक्ष की अनन्त गहराईयों तक का सार छुपा है इनमें एक बेबस का अनकहा, अनचाहा प्यार छुपा है " -डा0 अनिल चडडा All the content of this blog is Copyright of Dr.Anil Chadah and any copying, reproduction,publishing etc. without the specific permission of Dr.Anil Chadah would be deemed to be violation of Copyright Act.

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Thursday, May 31, 2007

शिकवे-गिले!

कभी शिकवा, कभी गिला करते
प्यार का ये सिला दिया करते

उम्र उम्मीद में गुज़ारी है
काश हमसे भी वो मिला करते

दोस्ती की है तो निभायेंगें
हम पे थोड़ा यकीं किया करते

एकतरफा हमारा प्यार सही
नजर इधर कभी किया करते

सोच मेरी, तुम्हारी सोच में है
मन की आवाज़ सुन लिया करते

2 Comments:

Blogger राजीव रंजन प्रसाद said...

डा. अनिल,
आपकी गज़ल बहुत अच्छी है। विशेषकर ये पंक्तियाँ:

उम्र उम्मीद में गुज़ारी है
काश हमसे भी वो मिला करते

सोच मेरी, तुम्हारी सोच में है
मन की आवाज़ सुन लिया करते

बधाई आपको

*** राजीव रंजन प्रसाद

May 31, 2007 at 5:38 PM  
Blogger मोहिन्दर कुमार said...

अनिल जी,

सुन्दर गजल है प्यार में उम्मीद का आलम लिये.
लिखते रहिये

June 1, 2007 at 11:53 AM  

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