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कुछ तो मैं कह बैठा हूँ, अभी बहुत कुछ बाकी है,

कागज-कलम हैं मीत मेरे, शब्द ही दिल के साकी हैं !

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प्रेम अनुभूतियाँ

"मेरी अभिव्यक्तियों में सूक्ष्म बिंदु से अन्तरिक्ष की अनन्त गहराईयों तक का सार छुपा है इनमें एक बेबस का अनकहा, अनचाहा प्यार छुपा है " -डा0 अनिल चडडा All the content of this blog is Copyright of Dr.Anil Chadah and any copying, reproduction,publishing etc. without the specific permission of Dr.Anil Chadah would be deemed to be violation of Copyright Act.

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Friday, March 14, 2008

गज़ल

तुम क्या गये मेरी कविता ले गये,
मेरी प्रेरणा, मेरी विधा ले गये ।

अस्त-व्यस्त से सारे ख्याल हो गये,
भाव सभी अपने साथ ले गये ।

कद्रदानों की यूँ तो कोई कमी न थी,
बस तुम्ही तो हमें धता दे गये ।

दोस्त जिन्हे कहा दुनिया के सामने,
वक्त पर वही तो दगा दे गये ।

अब ना माँगेंगें कभी किसी से कुछ,
अब तक के ग़म ही मेरी जाँ ले गये ।

4 Comments:

Blogger परमजीत बाली said...

बहुत अच्छी गजल है।बधाई।

March 14, 2008 at 1:32 PM  
Blogger ©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) said...

धन्यवाद परमजीत जी !

March 14, 2008 at 2:06 PM  
Anonymous mehek said...

अस्त-व्यस्त से सारे ख्याल हो गये,
भाव सभी अपने साथ ले गये । bahut khub

March 14, 2008 at 8:25 PM  
Blogger ©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) said...

धन्यवाद महक जी ।

March 14, 2008 at 8:41 PM  

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