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कुछ तो मैं कह बैठा हूँ, अभी बहुत कुछ बाकी है,

कागज-कलम हैं मीत मेरे, शब्द ही दिल के साकी हैं !

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प्रेम अनुभूतियाँ

"मेरी अभिव्यक्तियों में सूक्ष्म बिंदु से अन्तरिक्ष की अनन्त गहराईयों तक का सार छुपा है इनमें एक बेबस का अनकहा, अनचाहा प्यार छुपा है " -डा0 अनिल चडडा All the content of this blog is Copyright of Dr.Anil Chadah and any copying, reproduction,publishing etc. without the specific permission of Dr.Anil Chadah would be deemed to be violation of Copyright Act.

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Thursday, February 21, 2008

गज़ल!

मेरी सोच तुम पर ही अटक गई,
जिंदगी इसी मोड़ पर भटक गई ।

आँखें जब भी बंद करता हूं कभी,
तेरी तस्वीर आँखों में मटक गई ।

यूँ तो खुश रहता है मन बेवजह,
तेरी कमी ही जीवन में खटक गई ।

आँखें जब-तब खोजने लगती हैं तुम्हे,
तुम्हारी याद ज़हन में खनक गई ।

कभी मिल जाओगे अचानक ही राहों में,
इसी आस में ये अंखियाँ चमक गईं ।

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2 Comments:

Anonymous विनय प्रजापति 'नज़र' said...

यूँ तो खुश रहता है मन बेवजह,
तेरी कमी ही जीवन में खटक गई ।

सच्चाई भरा नज़रिया...

February 21, 2008 at 5:44 PM  
Blogger ©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) said...

आपको गज़ल अच्छी लगी, उसके बहुत बहुत शुक्रिया विनय जी ।

February 22, 2008 at 11:06 AM  

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