tag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post6958385948011193400..comments2008-05-08T20:21:46.699+05:30Comments on प्रेम अनुभूतियाँ: नहीं जाने कल फिर कौन कहाँ !©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)http://www.blogger.com/profile/05113649126978140864noreply@blogger.comBlogger8125tag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post-25692978908863482952008-05-08T20:21:00.000+05:302008-05-08T20:21:00.000+05:30रक्षँदाजी,हौसला अफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया ।रक्षँदाजी,<BR/><BR/>हौसला अफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया ।©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)http://www.blogger.com/profile/05113649126978140864noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post-45182296882409777712008-05-08T20:20:00.000+05:302008-05-08T20:20:00.000+05:30कृष्णलालजी,आपके उदगार पढ़ कर बरबस ही मुस्का उठा । ब...कृष्णलालजी,<BR/><BR/>आपके उदगार पढ़ कर बरबस ही मुस्का उठा । बड़े भाईसाहब, ग़र सपनों में हाँ करती है, तभी तो मौन को हाँ मानने की बात है । नहीं तो न ही न है । है न!!©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)http://www.blogger.com/profile/05113649126978140864noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post-4913986936074515102008-05-08T20:18:00.000+05:302008-05-08T20:18:00.000+05:30उड़नजी,आपको मेरी कविताएँ पसन्द आती हैं, अच्छा लगता ...उड़नजी,<BR/><BR/>आपको मेरी कविताएँ पसन्द आती हैं, अच्छा लगता है । आपकी प्रतिक्रिया के लिये आभारी हूँ ।<BR/>मेरे मुख्यत: दो ब्लाग हैँ । हाल ही में मैंने अपनी कहानियों का ब्लाग(http://chunindikahaniyan.blogspot.com) आशा है आप इसे भी पसन्द करेंगें ।©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)http://www.blogger.com/profile/05113649126978140864noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post-65897383012389669712008-05-08T11:57:00.000+05:302008-05-08T11:57:00.000+05:30मैं सपने को सच मानुँ,या फिर मानुँ तेरे मौन को हाँ ...मैं सपने को सच मानुँ,<BR/>या फिर मानुँ तेरे मौन को हाँ !<BR/><BR/> तो क्या सपनो मे "ना " कहती है जो सामने आने पर मौन को "हाँ " मानना पड रहा है अगर ऐसा है तो जो शोभा जी ने कहा है सही कहा है। <BR/> वैसे बहुत ही सुन्दर कविता । सप्नों से लेकर दिन के उजाले तक का सफर करवाती कविता। बस जरा ना और हा मे उलझन है ।krishan lal krishannoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post-17942725331095718452008-05-08T10:57:00.000+05:302008-05-08T10:57:00.000+05:30सुंदर कवितासुंदर कविताrakhshandahttp://www.blogger.com/profile/08686945812280176317noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post-38529118362210954512008-05-08T08:44:00.000+05:302008-05-08T08:44:00.000+05:30उम्दा रचना:------------------------------आप हिन्दी...उम्दा रचना:<BR/>------------------------------<BR/><BR/>आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.<BR/><BR/>एक नया हिन्दी चिट्ठा भी शुरु करवायें तो मुझ पर और अनेकों पर आपका अहसान कहलायेगा. <BR/><BR/>इन्तजार करता हूँ कि कौन सा शुरु करवाया. उसे एग्रीगेटर पर लाना मेरी जिम्मेदारी मान लें यदि वह सामाजिक एवं एग्रीगेटर के मापदण्ड पर खरा उतरता है.<BR/><BR/>यह वाली टिप्पणी भी एक अभियान है. इस टिप्पणी को आगे बढ़ा कर इस अभियान में शामिल हों. शुभकामनाऐं.Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post-17690633326688649842008-05-08T06:26:00.000+05:302008-05-08T06:26:00.000+05:30धन्यवाद शोभा जी । परन्तु यदि सपने ही सच हों तो इन्...धन्यवाद शोभा जी । परन्तु यदि सपने ही सच हों तो इन्सान को सभी कुछ मिल जाये ।©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)http://www.blogger.com/profile/05113649126978140864noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7703896360775698636.post-67906408515383687492008-05-07T21:44:00.000+05:302008-05-07T21:44:00.000+05:30अनिल जीअच्छी रचना। आप सपनों को ही सच मान लीजिए।अनिल जी<BR/>अच्छी रचना। आप सपनों को ही सच मान लीजिए।शोभाhttp://www.blogger.com/profile/01880609153671810492noreply@blogger.com